आंतरिक जल प्रवाह वाली नदियां

यह नदियां अपना दल किसी समुंदर में नहीं ले जा पाती और ना ही इन नदियों की कोई सहायक नदियां होती है तथा यह राज्य के ही कुछ भागों में प्रवाहित होते हुए विलीन या विलुप्त हो जाती है आंतरिक प्रवाह की नदियां राज्य की कुल नदियों का लगभग 60% है

घग्गर नदी

उद्गम स्थल कालका के समीप हिमालय की शिवालिक पहाड़ियां
घग्गर नदी वैदिक संस्कृति की सरस्वती नदी के पेटे में बहती है यह राजस्थान में अंतर परवाह की सबसे लंबी नदी है सरस्वती नदी का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है इसे पंजाब में चिटांग कहते हैं किसी समय यह नदी जब उफान पर होती थी तो तलवाड़ा, अनूपगढ़ और सूरतगढ़ होती हुई भारत पाकिस्तान सीमा को पार करके फोर्ट अब्बास पाकिस्तान तक चली जाती थी वहां यह हकरा नाम से जानी जाती थी वर्तमान में यह नदी हनुमानगढ़ से कुछ ही आगे तक पहुंच पाती है घग्गर नदी को नाली कहा जाता है सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख केंद्र इसी नदी के किनारे पर स्थित है

काकनी नदी

उद्गम स्थल: कोटरी जैसलमेर
इस नदी का उपनाम मसूरदी काकनेय है बुझ झील जैसलमेर इस नदी का निर्माण करती है

कतली नदी

उद्गम स्थल: खंडेला की पहाड़ियां सीकर
काली नदी का बहाव क्षेत्र तोरावाटी कहलाता है यह नदी चूरू और झुंझुनू की सीमा पर विलुप्त हो जाती है यह नदी झुंझुनू को दो भागों में बांटती है सीकर जिले में स्थित गणेश्वर की सभ्यता का विकास इसी नदी के तट पर ही हुआ था

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