चम्बल नदी

1. चम्बल नदी का उदगम
►-जानापाव की पहाड़ी महू मध्यप्रदेश से
2. राजस्थान मेँ प्रवेश
►- चौरासीगढ़ चित्तौड़गढ़
3. नित्यवाही नदी हैँ
4. इस पर 4 बाँध हैँ
►-(a). गाँधीसागर मंदसौर मध्यप्रदेश मेँ सबसे बड़ा बाँध इस नदी का
(b). राणाप्रताप सागर→ रावतभाटा चित्तौड़गढ़ , राज्य का जलभराव की दृष्टी से सबसे बड़ा बाँध, परमाणु संयंत्र 1972 कनाडा के सहयोग से, इसका हैड ऑफिस कोटा मेँ हैँ
(c). कोटा बैराज→ कोटा मेँ
(d). जवाहरसागर→ कोटा & बूँदी
5. राज्य का सबसे बड़ा जलप्रपात
►- चूलिया जल प्रपात 18 मीटर ऊँचा
6. चम्बल नदी यमुना नदी मिलती मिलती
►-मुरादगंज, इटावा, UP मेँ यमुना नदी मेँ जाकर मिल जाती
7. चम्बल नदी गिरती हैँ
6. बंगाल की खाड़ी मेँ गिरती हैँ
7. ➨ TRICK Q.→चम्बल का प्रवाह क्षेत्र
►- दुनिया TRICK की ➨ “सचि को दो कबूतर” ➨
स – सवाईमाधोपुर
चि – चित्तौड़गढ़
को – कोटा
दो – धोलपुर
क – करौली
बू – बूँदी
तर – #
8. ➨ TRICK Q.→चम्बल की सहायक नदियाँ
►- दुनिया TRICK की ➨ “बबा पर मेँ काकु” ➨
ब – बनास
बा – बामनी
पर – परवन
मे – मेज
का – कालीसिँध
कु – कुराल
9. चम्बल महत्वपूर्ण तथ्य -
►- (a). उद्गम विन्ध्याचल पर्वत के महु से जानापावों की पहाड़ी से निकलती हैँ
(b). चित्तौड़गढ़ के उत्तर में भैंसरोड़गढ़ नामक स्थान पर बामनी नदी बांई ओर से चम्बल नदी में गिरती हैं
(c). घड़ियालो के लिए भी प्रसिद्ध हैँ
(d). चम्बल नदी के आस-पास बीहड़ क्षेत्र के विकास के लिए-
(¡) डांग क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम
(¡¡) कन्दरा क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम चल रहे हैं
(e). चम्बल नदी पर भारत का एकमात्र घड़ियाल अभयारण्य स्थित हैं:- इस अभयारण्य के अंतर्गत भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य, जवाहरसागर अभयारण्य, चम्बल अभ्यारण्य शामिल हैं। ये तीनों घड़ियाल अभयारण्य के अंतर्गत आते हैं
(f). मुरैना मध्यप्रदेश में घड़ियाल प्रजनन केन्द्र स्थित हैं, जहां से घड़ियाल चम्बल नदी में छोड़े जाते हैं
(g). चम्बल नदी में डॉल्फिन मछली पाई जाती हैं , जिसे गांगेय सूस कहते हैं
(h). चम्बल का बहाव-चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर में बहते हुए उत्तरप्रदेश में ईटावा के पास (मुरादगंज) के पास यमुना में मिलती हैं
(i). चम्बल नदी यमुना की सबसे लम्बी सहायक नदी हैं
(j). कोटा, बूंदी व करौली मे यह नदी घाटी/भंरश/दरार में बहती हैं
(k). राजस्थान व मध्यप्रदेश के बीच 252 किलोमीटर लम्बी सीमा बनती हैं
(l). राजस्थान में चम्बल की कुल लम्बाई 135 किलोमीटर हैं
(m). चम्बल की कुल लम्बाई 1050 किलोमीटर हैं
(n). चम्बल का उपनाम:- कामधेनू, चर्मण्वती, सदानीरा, नित्यवाही हैं
(o). चम्बल नदी पर स्थित बांध (उत्तर से दक्षिण क्रम में)
►- 1. कोटा-बैराज बांध-कोटा में स्थित, यह अवरोधक बांध हैं , कोटा बैराज बांध से सिंचाई के लिए नहरे निकली गई हैं
2. जवाहर सागर बांध-कोटा में स्थित, इससे जल-विद्युत उत्पादित होता हैं इससे सिंचाई नहीं होती हैं
3. राणाप्रताप सागर बांध-चित्तौड़गढ़ में स्थित भैंसरोड़गढ़ के पास (चैरासीगढ़ के उत्तर में) जल विद्युत उत्पन्न होता हैं
4. गांधी सागर बांध-यह बांध राजस्थान से बाहर मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित हैं उपर्युक्त सभी बांधों को चम्बल नदी घाटी परियोजना कहते हैं
(p). राजस्थान की पहली परियोजना थी
(q). यह परियोजना राजस्थान व मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना हैं , जिसमेँ राजस्थान 50% – मध्यप्रदेश 50% की भागीदारी हैं |
(r). चम्बल व माही नदी दक्षिण से प्रवेश करती हैं |
(t). दूसरी पंचवर्षीय योजना में उत्पादन शुरू व पहली में स्थापना
(u). चम्बल नदी पर कुल 8 लिफ्ट नहर हैं, जिसमें से 6 लिफ्ट नहर बांरा के लिए (बांरा–वराहनगरी), 2 कोटा के लिए
(v). इंदिरा लिफ्ट नहर-सवाईमाधोपुर में स्थित इससे करौली जिले को पेयजल व सिंचाई के लिए पानी मिलता हैं
10.. कुल विद्युत उत्पादन- 386 मेगावाट
►- जवाहर सागर बांध- 99 मेगावाट
►- राणाप्रताप सागर बांध- 115 मेगावाट
►- गांधी सागर बांध- 172 मेगावाट
►- 386/2→193 मेगावाट राजस्थान व 193 मेगावाट मध्यप्रदेश को प्राप्त होता हैं
11. दांयी और से चम्बल में मिलने वाली नदिया -
►-कालीसिंध, पार्वती, आहु, परवन, निवाज/निमाज
12. कालीसिंध और आहु का संगम झालावाड़ में होता हैं जहां गागरोन का किला स्थित हैं जो की जलीयदुर्ग की श्रेणी मेँ आता हैं
13. भैसरोड़गढ़ (राजस्थान का वैल्लौर) विशुद्ध रूप से जलदुर्ग हैं जो बामनी व चम्बल नदी के संगम पर स्थित हैं
14. कालीसिन्ध का उदगम बागली की पहाड़ी मध्यप्रदेश
पार्वती का उदगम विन्धयाचल पर्वत के सेहोर मध्यप्रदेश
निवाज का उदगम विन्धयाचल पवर्त के उत्तरी भाग मेँ राजगढ़ मध्यप्रदेश हैं
15. परवान यह घोड़ा पछाड़ की संयुक्त जलधारा हैँ जो मध्यप्रदेश से निकलती हैँ
16. नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत सर्वप्रथम कालीसिन्ध व बेतवा को जोड़ा जाएगा
17. चम्बल नदी में बांई ओर से मिलने वाली नदियां
►-बनास, बेड़च, कोठारी, खारी, मानसी, मोरेल, कुराल बामनी आदि हैं
18. राजस्थान मेँ सर्वाधिक अवनलिका अपरदन इसी द्वारा किया जाता हैँ
19.. कालीसिँध व आहु नदियोँ के संगम स्थल को “सामेला” कहा जाता हैँ
20.. यह नदी गार्ज बनाती हैँ |
21.. मृदा अपरदन विख्यात हैँ मृदा अपरदन को रोकने के लिए “सीडा परियोजना” चलाई गई , तथा भारत सरकार ने “रंजाद” परियोजना चलाई हैँ
22. यह नदी नीचे से चौड़ी तथा ऊपर से सकड़ी हैँ इसलिए गार्ज नदी भी कहा जाता हैँ

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